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Saturday, September 1, 2012

सब बंधन खोल दिए तुमने (for my teachers..Happy teacher's day)

As Teacher's Day is approaching, this one is for all my teachers, who, made me, "ME"....

सब बंधन खोल दिए तुमने .....

ज्ञान के संसार के
आकाँक्षाओं के आसमान के
जीवन के वरदान के
सब अमृत बोल दिए तुमने
सब बंधन खोल दिए तुमने ...

सोच के विचार के
रिश्तों के आचार के
उमंगों के संचार के
सब स्पंदन घोल दिए तुमने
सब बंधन खोल दिए तुमने ...

                       हम पंख फडफडाते ही रह जाते
                       उड़ने की कला जो न तुम सिखाते
                       हम उड़ के भी न उड़ पाते
                       संघर्ष जो न तुम हमें बताते
                       हम आज आसमानों में जो हैं
                       तुम्हारे ही आभारी हैं
                       तुम साथ रहे जो पग पग कल
                       आज हम उड़ने के अधिकारी हैं

ये जीवन जीने के लिए, दे दिए सपने नये
हम सभी झुके हैं चरणों में, करते है शत नमन तुम्हे
सब बंधन खोल दिए तुमने।।



Tuesday, August 21, 2012

This poem was written about 7-8 yrs ago, I  was studying....and so you  will feel the surge of determination as I felt while writing it. Its like an inspiration to,whenever I am down an out....what do you  think shouldn't I get  this added to  School books....joking..ami asking too much???

"निश्चय "

मार्ग  विषम है ,
मगर विकट सी, इच्छा भी है
जाने  की
ऊँचे पर्वत, गहरी नदिया
चाँद और  सूरज
पाने की ;

बहुत दिलासे देता है मन
यूँ  भी  तो है सुखमय जीवन
फिर भी ये हिम्मत है कहती
धुन पक्की है दीवाने की;

रुकना मत
तेर्री ज़रुरत
जीवन के पार है जाने की
जीवन से जीवन पाने की;

चलना  नहीं छोड़ सकती मै,
मेरा  मन ये कहता हर पल
जिस क्षण थक के गिर जाउंगी,
जीवन हो   जायेगा मरुस्थल;

बहुत दूर, धुंधली काया सी
मेरी  मंजिल दिखती है
उसको भी तो आस लगी  है
मेरे उसको पाने की.
मुझको गले लगाने की !!!