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Tuesday, August 23, 2016

Rebel................Dedicated to #IndianWomanOlympiansRio2016

Dedicated to all the Sheroes of India..who dared to dream!
#WomanOlympians.
Badal rahi hai Bharat ko Beti..
Change is inevitable and desirable!

Rebel

No guilt
No confessions
No more lies
So what if I wanna live
Life that defies

Stringless love
Speaking smiles
Relations to die
Break open that shell
No more shy

Desolate life
Confined privileges
Foes pry
I wont take that limit
I eye the sky

Yes a rebel
I stake my bait
Choices high
This one I take
Stop Me? ...You can try..


Saturday, August 13, 2016

वीर


                                             

On the eve of Independence day....

फिर से खेतों की सरसों पर
मतवाली पवन लहराई 
फिर से नदियों की लहरें
मचल मचल इठलाईं
फिर जोश आ गया खून में
नसें तन तन के चिल्लाईं
आज फिर देश पे
जान देने की ऋतु आई

कोई लक्ष्मण नहीं तोड़ेगा
आज राम का वचन
एक बूँद भी रक्त की
जब तक इस तन में शेष है
प्राणों के कण कण में
जब तलाक आवेश है
छू ना सकेगा कोई रावण
मेरी माँ, मेरा वतन !

आओ कर लें ये प्रण
मातृभूमि को कर के नमन
इस काल , बनके काल
काट के चक्रव्यूह के जाल
हर अभिमन्यु होगा पार
भारत माँ के चरणों में
न्योछावर कर अपना प्यार
देगा सर्वस्व वार

शहीदों की चिताओं पे रोके
तुम त्याग का अपमान न करना
वो छोड़ गए?... पर कहाँ गए?
वो दिलों में प्राणित  रहतें हैं
देखो इस पावन मिटटी में
जीवन के रूप से रहतें हैं
इस देश की नदियों में
अमृत बन के बहते हैं

वो अपनों की आँखों में
गर्व से चमकते हैं
ये भारत है दुनियावालों
लहू नहीं देशप्रेम के जज़्बे
यहाँ नसों में बहते हैं
प्राणों की आहुति देकर
कण कण की हिफाज़त करते हैं
इन्ही इरादे से नए वीर फिर बनते हैं ! 



Saturday, July 16, 2016

हिम्मतवारी



The 'Determined' are here to stay, they go on and on as they just eye their aim. Just tried to #speakout for the determined women. They are no more timid or dependent, they can change the world! Tortures n pain don't bother them anymore...

जिंदगी मार मार क खड़ी करे
जो टूट गई थी सारी सी
बन गयी कड़ी कुछ हो न हो
अब नही रही दुखियारी सी

कितना तोड़े , मै ना टूटी
हल्ला गुल्ला सरफोडी सी
कितने जीत ले युद्ध मोंडे
जिंदगी न जीतें इक मोंडी सी

सौ काट काट के कर टुकड़े
कैसे कटे ये हिम्मत सँकरी सी
चित पड़ जावेगा भूतल ते
इक वार करूँ जो हँसरी सी

ना मै ,ना टूटा कोई सपना मेरा
ना रहूँ कभी बिचारी सी
भौचक्का सा तू भी सोचेगा
है कौन ये हिम्मतवारी सी