Showing posts with label #love. Show all posts
Showing posts with label #love. Show all posts

Wednesday, January 4, 2017

पुरानी मोहब्बत...

कभी कभी मौसम भी हमें पुरानी सुहानी यादों में ले जाता है....हमें ऐसी कुछ बातें याद दिलाता है जिन्हें वैसे तो हम भूल चुके हो पर दिल के किसी कोने में उसका अस्तित्व हमेशा से है ये याद आ जाता है...कुछ ऐसी ही होती है ..पुरानी मोहब्बत....हमेशा आकर्षक एवं मोहक।

ये बादामी धूप
गुलाबी सर्दियों का ये जूनून
हवाओं की खुराफाती सरसराहट
परिंदों का बेवजह चहकना
फूलों की ये बेजा मुस्कराहट
ठहरे पानी सी ज़िन्दगी में
गिट्टियां फेंक के छल्ले बनाती
इशारों में इतना प्यार जताती
मुझे ही घेरे, कानो में कुछ फुसफुसाती
छेड़ती गुदगुदाती ये तितलियाँ

मौसम की ये सारी शरारत
समझ आने लगी है
ये ख़ामोशी भी अब तो
शिद्दत से कह रही है
शहर में लौट के आई है
किसी और के सपनों की चुनर ओढ़े
मेरे निश्छल अधूरे एहसास सी
इतनी दूर होके भी कितनी पास सी
हर पल भूल के भी याद सी
कच्ची कैरी के स्वाद सी

पुरानी मोहब्बत...


Thursday, December 8, 2016

तुम हो तो मैं हूँ


This poem speaks about the immense power one feels when together with their love, that one starts defining their existence based on the sheer presence of it in their life. This is the very base of marriage....love and belonging. Feeling that it's not two separate people, it's their soul in unison. I am blessed and I know everyone can relate to it...feel blessed and wear the Crown of being in Love with pride!

तुम हो तो मैं हूँ

तुम्हारे साथ ही
हर पल की दिव्यता है
हर उपलब्धि में
दुगनी ख़ुशी है
हर लक्ष्य पूरा है
ये साथ ही, जीवन कथा है

संघर्ष क्षणिक है
अक्षुण्ण जीविता है
तुम्हारे हाथ ही
पालन है, तारण है
आशीर्वाद भी, स्नेह भी
तुमसे ही, प्रबुद्धता है

तमस भी धवल है
आनंद का आभास है
तुम्हारे साथ से ही
इक्षायें असीम है
चमकता प्रारब्ध है
तुमसे ही, हर साँस है

तुम नहीं जहां, वहाँ 
मै भी नहीं
अंशमात्र भी नही
तुम हो, तो, मैं हूँ
स्वतंत्र हूँ, सर्वत्र हूँ
तुम हो, तो ही, मै हूँ

तुम हो तो मैं हूँ 
तुम हो तो मैं हूँ 


Saturday, November 12, 2016

संतान


Dedicated to the magic God has bestowed us all with...mesmerise with peace it brings to be someone's child, to be a mother. Satisfaction of the highest accord....feel what i feel when I write about the beauty of this relationship!
संतान

धूप मेरी और छाँव तेरी
ये रिश्ता सीधा सादा
उलझन सारी खोल दूँ आ
रख ले सब आधा आधा

आँसू सारे दे मुझको
रख उतनी ही मुस्कान मेरी
यूँ भीगी हों मेरी पलकें
तू जग मे फैला मुस्कान मेरी

सौन्दर्य है तू और सँवर
नदियों का ले उन्माद अविरल
धारा है तू मै हूँ भँवर
गहराई मेरी तू उन्मुक्त उछल

चमके तू दीपक सा धवल
उस दीपक के तल का मैं तमस
जग को दे देना तू दिवाली
हर लूँ मै तेरी हर अमावस

पर हर रूप हर भेष मे
तेरा सुख ही मेरा निदान है
खुश हूँ मै तेरे हर सुख से
माँ हूँ मै, तू मेरी संतान है